Pritam and Pedro Web Series Review

राजकुमार हिरानी के डिजिटल डेब्यू में दिखा अरशद वारसी और वीर हिरानी का अनोखा तड़का, जानें कैसी है वेब सीरीज

Pritam and Pedro review

Pritam and Pedro Webs Series Review: राजकुमार हिरानी के डिजिटल डेब्यू में दिखा अरशद वारसी और वीर हिरानी का अनोखा तड़का, जानें कैसी है वेब सीरीज

वेब सीरीज: प्रीतम एंड पेड्रो (Pritam and Pedro)

ओटीटी प्लेटफॉर्म: जियोहॉटस्टार (JioHotstar)

क्रिएटर/निर्माता: राजकुमार हिरानी

निर्देशक: अविनाश अरुण धवाड़े

मुख्य कलाकार: अरशद वारसी, वीर हिरानी, विक्रांत मैसी, मोना सिंह, बोमन ईरानी

रेटिंग: ★★★★☆ (4/5 स्टार)

आज के इस डिजिटल युग में जहां ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर डार्क, सस्पेंस और खूनी थ्रिलर्स की बाढ़ आई हुई है, वहीं कुछ ऐसी कहानियां आती हैं जो आपके दिल को छू जाती हैं और चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान छोड़ जाती हैं। बॉलीवुड के दिग्गज फिल्ममेकर राजकुमार हिरानी (Rajkumar Hirani) की पहचान हमेशा से ऐसी ही फिल्में बनाने की रही है जो दर्शकों को हंसाने के साथ-साथ एक गहरा मानवीय संदेश भी देती हैं।

अब राजकुमार हिरानी ने डिजिटल की दुनिया में अपना पहला कदम रख दिया है। बतौर क्रिएटर और को-राइटर उनकी नई वेब सीरीज ‘प्रीतम एंड पेड्रो’ (Pritam and Pedro) जियोहॉटस्टार (JioHotstar) पर रिलीज हो चुकी है। पाताल लोक (Paatal Lok) और ‘थ्री ऑफ अस’ जैसी बेहतरीन कृतियों के लिए मशहूर अविनाश अरुण द्वारा निर्देशित यह सीरीज एक ऐसा अनोखा साइबर क्राइम ड्रामा है, जिसमें थ्रिलर के साथ-साथ हिरानी स्टाइल का ‘ह्यूमर और हार्ट’ (मजाक और जज्बात) कूट-कूट कर भरा है।

आइए HamaraTimes.com की इस एक्सक्लूसिव और डिटेल्ड समीक्षा (Web Series Review) में जानते हैं कि क्या यह सीरीज आपके वीकेंड बिंज-वॉच की लिस्ट में शामिल होने के लायक है या नहीं।

कहानी: ओल्ड-स्कूल पुलिसिंग बनाम न्यू-एज हैकिंग

‘प्रीतम एंड पेड्रो(Pritam and Pedro)’ की कहानी खूबसूरत और रंगीन राज्य गोवा की पृष्ठभूमि पर आधारित है। यह कहानी दो ऐसे किरदारों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं—मानो उत्तर और दक्षिण ध्रुव।

एक तरफ हैं इंस्पेक्टर पेड्रो गोंसाल्वेस (अरशद वारसी), जो क्राइम ब्रांच के एक ओल्ड-स्कूल (पुरानी सोच वाले) पुलिस अफसर हैं। पेड्रो का मानना है कि असली पुलिसिंग तकनीक से नहीं, बल्कि पुलिसिया रौब, जमीनी मुखबिरों और अपने ‘गट फीलिंग’ (अंतरात्मा की आवाज) से होती है। वे कंप्यूटर और स्मार्टफोन की इस नई दुनिया से कोसों दूर हैं और आज भी ईमेल की बात होने पर “लिफाफा कहां है?” जैसा मासूम सवाल पूछ बैठते हैं।

दूसरी तरफ है प्रीतम पारकर (वीर हिरानी), जो कहने को तो एक वैक्यूम क्लीनर सेल्समैन है, लेकिन असल में वह कोडिंग और एथिकल हैकिंग का बेताज बादशाह है। प्रीतम की जिंदगी में तब तूफान आता है जब उसके दादाजी (विनोद नागपाल) का एक पुराना टेप रिकॉर्डर चोरी हो जाता है। इस टेप रिकॉर्डर में प्रीतम की स्वर्गीय दादी की आवाज में गाया हुआ आखिरी गाना रिकॉर्ड है, जो उनके दादाजी की जीने की इकलौती उम्मीद है। जब पुलिस इस छोटी सी चोरी को गंभीरता से नहीं लेती, तो प्रीतम की पुलिस स्टेशन में बहस हो जाती है और वह जेल पहुंच जाता है।

ठीक उसी समय, गोवा पुलिस एक बड़े एटीएम चोरी (28 लाख रुपये की लूट) के मामले में उलझी होती है। जेल की सलाखों के पीछे से प्रीतम, पेड्रो को चुनौती देता है कि वह महज 15 मिनट में चोरों का पता लगा सकता है। पेड्रो उसे मजाक समझकर कंप्यूटर देता है, लेकिन प्रीतम अपनी जादुई हैकिंग स्किल्स से तय समय के भीतर केस सुलझा देता है।

कहानी में असली ट्विस्ट तब आता है जब पेड्रो, खेल मंत्री डी.एन. सरदेसाई (सत्यदीप मिश्रा) के साथ एक विवाद के बाद सजा के तौर पर ‘साइबर क्राइम सेल’ में ट्रांसफर कर दिए जाते हैं। पेड्रो के लिए यह किसी नरक से कम नहीं है क्योंकि उन्हें कंप्यूटर चलाना तक नहीं आता। इसी बीच, खेल मंत्री के बेटे विन्नी का अपहरण (Kidnapping) हो जाता है और यह मामला साइबर सेल के पास आता है। पेड्रो को समझ आता है कि अगर उन्होंने इस हाई-प्रोफाइल केस को सुलझा लिया, तो उनकी वापसी दोबारा मुख्य क्राइम ब्रांच में हो सकती है। बस फिर क्या था, पेड्रो अपने साथ इस मिशन पर डिजिटल जीनियस प्रीतम को शामिल करते हैं।

अब एक तरफ है शातिर, सनकी और सोशियोपैथ हैकर मार्टिन (विक्रांत मैसी), जो डिजिटल दुनिया का सबसे बड़ा खतरा है, और दूसरी तरफ हैं बिना तकनीक के चलने वाले पेड्रो और उनका डिजिटल हथियार प्रीतम। क्या यह अनोखी जोड़ी मार्टिन के बुने डिजिटल चक्रव्यूह को भेद पाएगी? यही इस छह एपिसोड की सीरीज की मुख्य कहानी है।

लेखन और निर्देशन: अविनाश अरुण और राजू हिरानी की जुगलबंदी

Pritam and Pedro सीरीज की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) इसका स्क्रीनप्ले और डायरेक्शन है। जब ‘पाताल लोक’ जैसी डार्क सीरीज बनाने वाले अविनाश अरुण और ‘मुन्नाभाई एमबीबीएस’ व ‘3 इडियट्स’ जैसी इमोशनल-कॉमेडी बनाने वाले राजकुमार हिरानी एक साथ आते हैं, तो उम्मीदें आसमान पर होती हैं। खुशी की बात यह है कि ‘प्रीतम एंड पेड्रो(Pritam and Pedro)’ उन उम्मीदों पर पूरी तरह खरी उतरती है।

अमित दुबे की किताबों ‘हिडन फाइल्स’ और रिटर्न ऑफ द ट्रोजन हॉर्स’ से प्रेरित इस कहानी को राजकुमार हिरानी, अभिजात जोशी और सुयश त्रिवेदी ने बेहद खूबसूरती से लिखा है। सीरीज में साइबर अपराध (Cyber Crime), ब्लैकमेलिंग और ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसे गंभीर मुद्दों को उठाया गया है, लेकिन इसे समझाने का तरीका इतना सरल और मनोरंजक है कि एक आम दर्शक भी कोडिंग और आईपी एड्रेस के खेल को आसानी से समझ सकता है।

अविनाश अरुण का निर्देशन कमाल का है। उन्होंने गोवा को सिर्फ समुद्र तटों और पार्टियों के रूप में नहीं, बल्कि कहानी के एक जीवंत किरदार के रूप में पेश किया है। सीरीज का पेस (गति) काफी तेज है। कहीं भी कहानी सुस्त नहीं पड़ती और हर एपिसोड के अंत में आने वाला सस्पेंस आपको अगला एपिसोड देखने पर मजबूर कर देता है। प्रांजल सक्सेना और शशांक कुंवर द्वारा लिखे गए संवाद (Dialogues) बेहद चुटीले और मजेदार हैं, खासकर अरशद और वीर के बीच की नोकझोंक दर्शकों को खूब हंसाती है।

अभिनय: अरशद वारसी की वन-मैन आर्मी और वीर हिरानी का शानदार डेब्यू

अभिनय के मोर्चे पर यह सीरीज बेहद मजबूत है:

  • अरशद वारसी (पेड्रो गोंसाल्वेस): अरशद वारसी एक बार फिर साबित करते हैं कि कॉमिक टाइमिंग और नेचुरल एक्टिंग के मामले में उनका कोई सानी नहीं है। इंस्पेक्टर पेड्रो के किरदार में उन्होंने जान फूंक दी है। तकनीक से डरने वाले एक ‘कंजर्वेटिव’ पुलिसवाले के उनके हाव-भाव और डायलॉग डिलीवरी लाजवाब हैं। सीरियस सीन हो या कॉमेडी, अरशद हर फ्रेम में छाए रहते हैं।

  • वीर हिरानी (प्रीतम पारकर): राजकुमार हिरानी के बेटे वीर हिरानी ने इस सीरीज से अपना एक्टिंग डेब्यू किया है। पहली ही सीरीज में अरशद वारसी जैसे मंझे हुए कलाकार के सामने स्क्रीन शेयर करना आसान नहीं होता, लेकिन वीर ने अपने किरदार को बेहद सादगी और परिपक्वता के साथ निभाया है। एक शांत, गंभीर और अपनी धुन में रहने वाले टेक-गीक (Tech-Geek) के रूप में उनकी मासूमियत दर्शकों का दिल जीत लेती है।

  • विक्रांत मैसी (मार्टिन): विलेन मार्टिन के रूप में विक्रांत मैसी ने एक बार फिर अपनी बहुमुखी प्रतिभा (Versatility) का लोहा मनवाया है। ’12वीं फेल’ के सीधे-साधे मनोज कुमार के बाद, इस सीरीज में एक खतरनाक, ठंडे दिमाग वाले और सनकी हैकर के रूप में उनका ट्रांसफॉर्मेशन हैरान करने वाला है। जब भी वे स्क्रीन पर आते हैं, एक अजीब सा डर और तनाव पैदा कर देते हैं।

  • सपोर्टिंग कास्ट: पेड्रो की पत्नी स्टेसी के रूप में मोना सिंह ने छोटा लेकिन बेहद प्रभावशाली रोल निभाया है। पति-पत्नी के बीच के घरेलू झगड़े और प्यार को उन्होंने बखूबी दिखाया है। खेल मंत्री के रूप में सत्यदीप मिश्रा और उनके पीए के रूप में गौरव मोरे ने भी अच्छा काम किया है। इसके अलावा, बोमन ईरानी की मौजूदगी सीरीज को और भी खास बनाती है।

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क्यों देखनी चाहिए यह सीरीज? (सकारात्मक पहलू)

  1. लाइट-हार्टेड एंटरटेनमेंट: आज के दौर में जहां लगभग हर वेब सीरीज गाली-गलौज, अत्यधिक हिंसा और डार्क थीम पर आधारित होती है, वहीं ‘प्रीतम एंड पेड्रो’ एक ‘क्लीन’ और पारिवारिक एंटरटेनर है, जिसे आप अपने पूरे परिवार के साथ बैठकर देख सकते हैं।

  2. शानदार जुगलबंदी: अरशद वारसी और वीर हिरानी की ‘बडी-कॉप’ (दो दोस्तों वाली पुलिस जोड़ी) केमिस्ट्री सीरीज की सबसे बड़ी ताकत है। पुरानी पीढ़ी और नई पीढ़ी के विचारों का टकराव बेहद मजेदार तरीके से दिखाया गया है।

  3. साइबर अवेयरनेस: मनोरंजन के साथ-साथ यह सीरीज दर्शकों को आज के समय में हो रहे साइबर फ्रॉड्स, ऑनलाइन स्कैम्स और हैकिंग के खतरों के प्रति जागरूक भी करती है।

कहां रह गई कमी? (कमजोर पहलू)

हालांकि सीरीज बेहद मनोरंजक है, लेकिन कुछ जगहों पर राजकुमार हिरानी का पुराना प्रेडिक्टेबल (पूर्वानुमेय) अंदाज देखने को मिलता है। कहानी के कुछ मोड़ और क्लाइमेक्स का समाधान थोड़ा ज्यादा आसान और फिल्मी लगता है। कुछ दृश्यों में ऐसा महसूस होता है कि जटिल साइबर क्राइम को सुलझाने के लिए ‘सिनेमैटिक लिबर्टी’ (फिल्मी छूट) का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल किया गया है, जिससे वास्तविकता थोड़ी कम हो जाती है। लेकिन सीरीज का एंटरटेनमेंट वैल्यू इतना ज्यादा है कि आप इन छोटी-मोटी कमियों को आसानी से नजरअंदाज कर सकते हैं।

फैसला (Final Verdict)

‘प्रीतम एंड पेड्रो(Pritam and Pedro)’ एक ऐसी वेब सीरीज है जो सस्पेंस, कॉमेडी, थ्रिलर और इमोशन्स का एक परफेक्ट कॉकटेल है। राजकुमार हिरानी का डिजिटल डेब्यू बेहद सफल कहा जा सकता है, क्योंकि उन्होंने ओटीटी स्पेस में अपनी उसी पुरानी और भरोसेमंद ‘इंसानी जज्बातों’ वाली कहानी को एक नए और आधुनिक कलेवर (साइबर स्पेस) में पेश किया है।

अगर आप इस वीकेंड पर कुछ ऐसा देखना चाहते हैं जो आपको थ्रिल भी दे, हंसाए भी और अंत में एक अच्छा मैसेज भी छोड़ जाए, तो जियोहॉटस्टार पर ‘प्रीतम एंड पेड्रो(Pritam and Pedro)’ को बिल्कुल मिस न करें।

HamaraTimes.com की तरफ से इस सीरीज को 4 आउट ऑफ 5 स्टार। यह सीरीज पूरी तरह से पैसा वसूल (या कहें सब्सक्रिप्शन वसूल) है!

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