Indian Share Market का सफर FY 2025-26 में
विश्लेषण: FY 2025-26 में भारतीय शेयर बाजार(Indian Share Market) का सफर—मुनाफा, वैश्विक तुलना और भविष्य की राह
दिनांक: 10 मई, 2026
नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार(Indian Share Market) के लिए पिछला वित्त वर्ष (FY 2025-26), जो 31 मार्च 2026 को समाप्त हुआ, भावनाओं और आंकड़ों के एक उतार-चढ़ाव भरे रोलरकोस्टर की तरह रहा। जहां पिछले कुछ वर्षों में निवेशकों ने अभूतपूर्व रिटर्न देखा था, वहीं इस साल बाजार ने ‘संयम’ और ‘सतर्कता’ का पाठ पढ़ाया।
इस विस्तृत रिपोर्ट में हम जानेंगे कि पिछले एक साल में निवेशकों ने कितना कमाया, दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले भारत कहाँ खड़ा है, और वे कौन से कारक हैं जो दलाल स्ट्रीट पर दबाव बना रहे हैं।
1. वित्त वर्ष 2025-26: सेंसेक्स और निफ्टी का प्रदर्शन (एक सिंहावलोकन)
31 मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्त वर्ष में भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स (SENSEX) और निफ्टी 50 (NIFTY50) का प्रदर्शन उम्मीद से थोड़ा सुस्त रहा। आंकड़ों के अनुसार:
-
सेंसेक्स: इस वित्त वर्ष में सेंसेक्स में लगभग 7% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। 30 मार्च 2026 को (वर्ष के अंतिम ट्रेडिंग सत्र में) सेंसेक्स 71,947 के स्तर पर बंद हुआ।
-
निफ्टी 50: निफ्टी ने भी लगभग 5% की गिरावट दिखाई और यह 22,331 के स्तर पर समाप्त हुआ।
हालांकि, यह गिरावट पूरे बाजार की कहानी नहीं कहती। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में कुछ चुनिंदा शेयरों ने निवेशकों को अभी भी 30% से 100% तक का मुनाफा दिया है। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL), श्रीराम फाइनेंस और टाइटन जैसे शेयरों ने इस कठिन समय में भी सकारात्मक रिटर्न दिया।
2. वैश्विक तुलना: भारत बनाम दुनिया (Global Comparison)
जब हम भारतीय बाजार की तुलना वैश्विक बाजारों से करते हैं, तो वित्त वर्ष 2025-26 भारत के लिए “अंडरपरफॉर्मेंस” का साल रहा। दुनिया के कई अन्य बाजारों ने भारत की तुलना में काफी बेहतर प्रदर्शन किया।
| देश | बाजार सूचकांक (Index) | प्रदर्शन (FY 2025-26 अनुमानित) | मुख्य कारण |
| भारत | Sensex / Nifty | -5% to -7% | हाई वैल्यूएशन, FPI बिकवाली, टैक्स बदलाव |
| अमेरिका | S&P 500 / Nasdaq | +10% to +16% | AI और टेक शेयरों में जबरदस्त तेजी |
| जापान | Nikkei 225 | +25% to +30% | कॉर्पोरेट गवर्नेंस में सुधार और कमजोर येन |
| चीन | Shanghai Composite | +8% to +12% | कम वैल्यूएशन और सरकारी प्रोत्साहन (Stimulus) |
| पाकिस्तान | KSE 100 | +20% (उच्च अस्थिरता) | आर्थिक सुधार के संकेत और बेस इफेक्ट |
| ताइवान | TAIEX | +15% | सेमीकंडक्टर और चिप डिमांड |
| ब्राजील | Ibovespa | +5% | कमोडिटी की कीमतों में स्थिरता |
| वियतनाम | VN-Index | +10% | मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभरना |
विश्लेषण: जापान और अमेरिका जैसे विकसित बाजारों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की लहर और बेहतर तकनीकी विकास के कारण भारत को पीछे छोड़ दिया। वहीं, चीन जैसे बाजार, जो पिछले साल तक संघर्ष कर रहे थे, वहां निवेशकों को कम कीमत (Cheap Valuations) पर शेयर मिले, जिससे वहां पूंजी का प्रवाह बढ़ा।
3. भारतीय बाजार पर दबाव क्यों है? (Key Pressure Points)
भारतीय शेयर बाजार(Indian Share Market) के दबाव में रहने के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं:
क. ऊँचा मूल्यांकन (High Valuations)
भारतीय बाजार पिछले कई वर्षों से अपने ऐतिहासिक औसत से काफी ऊपर ट्रेड कर रहा था। निफ्टी का P/E रेश्यो 22-23 के आसपास था, जबकि अन्य उभरते बाजारों (Emerging Markets) का औसत 12-14 के आसपास था। निवेशकों ने महसूस किया कि मुनाफा कमाने के लिए कीमतें बहुत अधिक हैं, जिससे “प्रॉफिट बुकिंग” शुरू हुई।
ख. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की भारी बिकवाली
वित्त वर्ष 2025-26 में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से बड़े पैमाने पर पैसा निकाला। अकेले जनवरी 2026 तक लगभग ₹1.66 लाख करोड़ की शुद्ध बिकवाली देखी गई। विदेशी निवेशक अब भारत के बजाय सस्ते बाजारों जैसे चीन या उच्च रिटर्न वाले अमेरिकी टेक शेयरों की ओर रुख कर रहे हैं।
ग. कॉर्पोरेट आय में सुस्ती
कई दिग्गज कंपनियों के तिमाही नतीजे निवेशकों की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे। जब कंपनियों का मुनाफा उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ता, तो महंगे शेयरों की कीमतों का गिरना तय हो जाता है।
यह भी पढ़ें: Listunite सेवा प्रदाताओं के लिए मंच
4. कैपिटल गेन टैक्स (Capital Gain Tax) का प्रभाव
जुलाई 2024 के बजट के बाद से लागू हुए नए टैक्स नियमों का असर इस वित्त वर्ष में स्पष्ट रूप से देखा गया:
-
Long-Term Capital Gains (LTCG): इसे 10% से बढ़ाकर 12.5% कर दिया गया। हालांकि छूट की सीमा ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹1.25 लाख की गई, लेकिन बड़े निवेशकों के लिए 2.5% का अतिरिक्त टैक्स एक बड़ा बोझ बन गया।
-
Short-Term Capital Gains (STCG): इसे 15% से बढ़ाकर 20% कर दिया गया। इसने ‘स्विंग ट्रेडर्स’ और कम समय के लिए निवेश करने वालों के उत्साह को कम किया है।
प्रभाव: कर की दरों में वृद्धि ने निवेशकों के ‘नेट टेक-होम’ मुनाफे को कम कर दिया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे बाजार में तरलता (Liquidity) पर थोड़ा असर पड़ा है, क्योंकि निवेशक अब शेयरों को बेचने से पहले टैक्स गणना को लेकर अधिक सतर्क हैं।
5. क्या है समाधान? (The Way Out)
बाजार को दोबारा पटरी पर लाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बदलावों की आवश्यकता है:
-
बजट 2026 की उम्मीदें: बाजार को उम्मीद है कि सरकार LTCG की छूट सीमा को ₹1.25 लाख से बढ़ाकर ₹2 लाख कर सकती है। इससे छोटे और मध्यम निवेशकों को राहत मिलेगी।
-
ब्याज दरों में कटौती: यदि RBI मुद्रास्फीति के नियंत्रण में आने पर ब्याज दरों में कटौती करता है, तो बाजार में तरलता बढ़ेगी।
-
कॉर्पोरेट अर्निंग्स में सुधार: कंपनियों को अपने परिचालन मार्जिन (Operating Margins) में सुधार करना होगा ताकि निवेशकों का भरोसा दोबारा लौट सके।
6. निष्कर्ष: निवेशकों के लिए सलाह
HamaraTimes.com के पाठकों और निवेशकों के लिए संदेश साफ है: घबराएं नहीं।
भारतीय अर्थव्यवस्था अभी भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। बाजार का यह ‘करेक्शन’ या दबाव का दौर वास्तव में लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अच्छे शेयरों को निचले स्तर पर खरीदने का एक अवसर है। भले ही वित्त वर्ष 2025-26 आंकड़ों के लिहाज से फीका रहा हो, लेकिन भारत की विकास गाथा (India Growth Story) अभी भी बरकरार है।
निवेश मंत्र: “जब बाजार डरा हुआ हो, तब साहसी बनें, लेकिन केवल उन कंपनियों में निवेश करें जिनका फंडामेंटल मजबूत है।”
अस्वीकरण: शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। कृपया निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।
वित्तीय जगत और देश-दुनिया की ऐसी ही निष्पक्ष और सटीक खबरों के लिए जुड़े रहें HamaraTimes.com के साथ।
Follow us on Facebook, YouTube and Twitter for latest updates.











