Births and Deaths (Amendment) Bill, 2026 राज्यसभा में पास: अब 2 साल से अधिक देरी पर जाना होगा कोर्ट, जानिए आम जनता पर क्या पड़ेगा प्रभाव
राज्यसभा से पारित हुआ Births and Deaths (Amendment) Bill, 2026
नई दिल्ली (हमारा टाइम्स ब्यूरो): संसद के मानसून सत्र के दौरान एक ऐतिहासिक और अत्यंत महत्वपूर्ण विधायी बदलाव को अमलीजामा पहनाया गया है। राज्यसभा ने जोरदार हंगामे और विपक्ष के वॉकआउट/नारेबाजी के बीच ‘जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026’ (The Registration of Births and Deaths (Amendment) Bill, 2026) को ध्वनिमत से पारित कर दिया है। गौरतलब है कि यह विधेयक लोकसभा द्वारा पहले ही (31 जुलाई 2026 को) पारित किया जा चुका था।
राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह कानून का रूप ले लेगा। इस नए संशोधन के जरिए वर्ष 1969 के मूल अधिनियम की धारा 13(3) में सीधा और बड़ा बदलाव किया गया है। अब यदि किसी व्यक्ति का जन्म या मृत्यु(Births and Deaths) पंजीकरण 2 वर्ष से अधिक की देरी से कराया जाता है, तो इसके लिए अब प्रशासनिक अधिकारियों (जैसे एसडीएम या डीएम) के पास नहीं, बल्कि प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate First Class – JMFC) के पास जाना होगा और अदालती आदेश हासिल करना अनिवार्य होगा।
मुख्य बिंदु एक नज़र में (Key Highlights)
“2023 के संशोधन ने जन्म प्रमाण पत्र को देश का सबसे अहम पहचान दस्तावेज बनाया था। 2026 का यह संशोधन अब उस प्रवेश द्वार पर फर्जीवाड़े और अवैध घुसपैठ की सेंधमारी को रोकने के लिए लाया गया है।”
— संसदीय बहस के दौरान गृह राज्य मंत्री का बयान
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लोकसभा व राज्यसभा में पास: लोकसभा से पास होने के बाद 4 अगस्त 2026 को उच्च सदन (राज्यसभा) से मंजूरी मिली।
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धारा 13(3) में संशोधन: पंजीकरण में समय-सीमा (Time-Gap) के आधार पर प्रशासनिक और न्यायिक प्रक्रियाओं को दो वर्गों में विभाजित किया गया है।
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2 साल से ज्यादा देरी पर कोर्ट की मंजूरी: 2 साल से अधिक की देरी होने पर अब केवल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (JMFC) ही पंजीकरण का आदेश दे सकेंगे।
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फर्जी ‘डेमोग्राफिक डेटा’ और ‘गॉस्ट वोटर्स’ पर प्रहार: अवैध प्रवासियों, फर्जी प्रमाणपत्रों और मतदाता सूचियों में धांधली रोकने के उद्देश्य से यह सख्त कदम उठाया गया है।
क्या बदला है कानून में? (1969 एक्ट बनाम 2026 संशोधन)
1969 के मूल ‘रजिस्ट्रेशन ऑफ बर्थ्स एंड डेथ्स(Births and Deaths) एक्ट’ में पंजीकरण में देरी को लेकर जो व्यवस्थाएं थीं, उन्हें 2023 के कानून के बाद अब 2026 में बेहद सख्त बना दिया गया है। आइए समझते हैं कि नए नियम के तहत समय-सीमा का क्या गणित है:
| पंजीकरण में हुई देरी (Delay Period) | किसके आदेश/अनुमति की आवश्यकता? | प्रक्रिया में बदलाव और प्रशासनिक स्तर |
| 21 दिनों के भीतर | कोई विशेष अनुमति नहीं | सामान्य अस्पताल/स्थानीय निकाय प्रक्रिया (निःशुल्क) |
| 21 दिन से 30 दिन के भीतर | रजिस्ट्रार की अनुमति | विलंब शुल्क के साथ आसान प्रक्रिया |
| 30 दिन से 1 वर्ष के भीतर | जिला रजिस्ट्रार की लिखित अनुमति | स्व-सत्यापित दस्तावेज और निर्धारित फीस |
| 1 वर्ष से 2 वर्ष के भीतर | कार्यपालक मजिस्ट्रेट (SDM / DM / Executive Magistrate) | प्रशासनिक जांच के बाद आदेश (पूर्व व्यवस्था की तरह) |
| 2 वर्ष से अधिक की देरी | प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (JMFC) | अदालती सत्यापन, साक्ष्य प्रस्तुत करना और न्यायिक आदेश |
कानून को सख्त बनाने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
गृह मंत्रालय द्वारा संसद में प्रस्तुत ‘उद्देश्यों और कारणों के कथन’ (Statement of Objects and Reasons) के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में देर से जन्म प्रमाण पत्र बनवाने की आड़ में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी और संदिग्ध गतिविधियों के मामले सामने आए थे।
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1. फर्जी मतदाताओं और ‘गॉस्ट वोटर्स’ पर अंकुश
संसद में चर्चा का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि देश में कई स्थानों पर मृत व्यक्तियों के नाम मतदाता सूची से नहीं हटाए जा रहे थे, जिससे वे चुनावी राजनीति में “भूतिया वोटर्स” (Ghost Voters) बनकर कुछ दलों को फायदा पहुंचा रहे थे। साथ ही, फर्जी दस्तावेजों के दम पर नए मतदाता बनाने की कोशिशें हो रही थीं।
2. अवैध घुसपैठ और नागरिकता का दुरुपयोग
बहस के दौरान सत्तापक्ष के सांसदों ने यह मुद्दा उठाया कि देश के सीमावर्ती राज्यों में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनवाकर विदेशी नागरिकों (जैसे बांग्लादेशी या पाकिस्तानी घुसपैठियों) को भारतीय नागरिकता के कागजात दिलाने की कोशिशें हो रही थीं। चूंकि 2023 के संशोधन के बाद जन्म प्रमाण पत्र ही पासपोर्ट, आधार, वोटर कार्ड और राशन कार्ड का एकमात्र आधार बन चुका है, इसलिए इसकी पवित्रता बनाए रखना अनिवार्य था।
3. शत-प्रतिशत डिजिटल और सटीक डेटाबेस
सरकार का लक्ष्य है कि देश में जन्म लेने वाले हर बच्चे का रिकॉर्ड और मृत्यु को प्राप्त हर नागरिक का सटीक ब्योरा एक केंद्रीकृत डेटाबेस (Civil Registration System – CRS) में दर्ज हो। इससे कल्याणकारी योजनाओं, पेंशन, और सामाजिक सुरक्षा का लाभ सही हकदार तक पहुंचेगा।
राज्यसभा में तीखी बहस और विपक्ष का विरोध
विधेयक के पारित होने के दौरान राज्यसभा में जमकर हंगामा हुआ। विपक्षी दलों के सांसदों ने केंद्रीय गृह मंत्री की सदन में मौजूदगी की मांग की और नारेबाज़ी की। हालांकि, विरोध के बीच भी विधेयक पर संक्षिप्त चर्चा हुई।
विपक्ष और अन्य सांसदों द्वारा उठाए गए मुख्य सवाल:
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न्यायालयों पर अतिरिक्त बोझ: बीजेडी (BJD) के सासंदों और अन्य निर्दलीय व विपक्षी नेताओं ने चिंता जताई कि भारत की निचली अदालतों (Judiciary) में पहले से ही लाखों मुकदमे लंबित हैं। देर से पंजीकरण कराने वालों को ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के पास भेजने से आम ग्रामीण नागरिकों का चक्कर बढ़ेगा और अदालतों पर काम का बोझ बढ़ेगा।
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राज्यों में ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेटों की असमानता: कुछ सांसदों ने बताया कि देश के दूरदराज और आदिवासी इलाकों में न्यायिक अधिकारियों की संख्या कम है। गरीब, अशिक्षित या वंचित वर्गों के लोग जो अज्ञानता के कारण समय पर जन्म पंजीकरण नहीं करवा पाते, उन्हें वकील करने और कोर्ट जाने में भारी परेशानी होगी।
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विशेष शिविर लगाने का सुझाव: सदस्यों ने सुझाव दिया कि न्यायिक जटिलता बढ़ाने के बजाय सरकार को जगह-जगह स्पेशल कैंप (Special Registration Camps) और घर-घर अभियान चलाकर पंजीकरण को सुलभ बनाना चाहिए।
गृह राज्य मंत्री ने इन चिंताओं को खारिज करते हुए आश्वस्त किया कि न्यायिक जांच की प्रक्रिया पारदर्शी होगी और इसका उद्देश्य केवल फर्जीवाड़े पर रोक लगाना है, न कि निर्दोष नागरिकों को परेशान करना।
आम नागरिक पर क्या असर होगा? (What Changes for You?)
यदि आप एक आम भारतीय नागरिक हैं, तो आपको इस नए कानून के लागू होने के बाद कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना होगा:
1. समय पर पंजीकरण कराने की डालें आदत
बच्चे के जन्म या घर में किसी दुखद मृत्यु के 21 दिनों के भीतर अस्पताल या स्थानीय निकाय (नगर निगम/पंचायत) में इसकी जानकारी अवश्य दर्ज कराएं। यदि आप समय पर जानकारी दे देते हैं, तो प्रक्रिया अत्यंत सरल, त्वरित और परेशानी मुक्त रहती है।
2. अगर 2 साल से ज्यादा देर हो चुकी है तो क्या करें?
यदि आपके परिवार में किसी का जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र 2 साल से अधिक समय से नहीं बना है, तो अब आपको:
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संबंधित प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (JMFC) की अदालत में आवेदन दायर करना होगा।
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जन्म या मृत्यु(Births and Deaths) के ठोस सबूत (जैसे अस्पताल का डिस्चार्ज कार्ड, स्कूल का रिकॉर्ड, पंचायत/आंगनवाड़ी साक्ष्य) पेश करने होंगे।
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कोर्ट द्वारा सत्यापन (Verification) और संतुष्टि के बाद ही मजिस्ट्रेट रजिस्ट्रार को प्रमाणपत्र जारी करने का आदेश देंगे।
3. अन्य दस्तावेजों से जुड़ाव
याद रखें कि जन्म प्रमाण पत्र अब केवल एक कागज नहीं है। 2023 और 2026 के संशोधनों के बाद, यही दस्तावेज आपके बच्चे के स्कूल एडमिशन, पासपोर्ट आवेदन, वोटर आईडी कार्ड पंजीकरण, ड्राइविंग लाइसेंस, सरकारी नौकरी और आधार कार्ड बनवाने की पहली शर्त है।
विशेषज्ञ विश्लेषण: हमरा टाइम्स का नज़रिया
हमरा टाइम्स (HamaraTimes.com) के वरिष्ठ नीति विश्लेषकों का मानना है कि ‘जन्म और मृत्यु(Births and Deaths) पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026’ भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में एक कड़ा लेकिन आवश्यक कदम है।
1969 का कानून उस दौर का था जब रिकॉर्ड मैनुअल और बिखरे हुए हुआ करते थे। आज डिजिटल इंडिया के दौर में जहाँ हर भारतीय का डेटा बेस आपस में जुड़ रहा है, वहाँ एक फर्जी जन्म प्रमाण पत्र पूरे नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर और वोटर लिस्ट की शुचिता को भंग कर सकता है। हालांकि, केंद्र और राज्य सरकारों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि देश के सुदूर इलाकों में रहने वाले गरीब और अशिक्षित नागरिक अदालती चक्करों के बोझ तले न दबें। इसके लिए फास्ट-ट्रैक लीगल एड और स्पेशल ड्राइव की व्यवस्था प्रशासनिक स्तर पर की जानी चाहिए।
निष्कर्ष (Conclusion)
संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद ‘जन्म और मृत्यु(Births and Deaths) पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026’ अब राष्ट्रपति की स्वीकृति का इंतजार कर रहा है। यह कानून आम जनता को यह स्पष्ट संदेश देता है कि अपने जीवन के दो सबसे महत्वपूर्ण पड़ावों—जन्म और मृत्यु(Births and Deaths)—का समय पर आधिकारिक रिकॉर्ड दर्ज कराना अब केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक अनिवार्य नागरिक दायित्व है।
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