भारत और रूस: इतिहास, चुनौतियां और मजबूत होता सहयोग

भारत और रूस

भारत और रूस: इतिहास, चुनौतियां और मजबूत होता सहयोग

न्यूज़ डेस्क-भारत और रूस के बीच दशकों पुराना रिश्ता है। शीत युद्ध के दौरान सोवियत संघ भारत का एक प्रमुख सहयोगी था। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान भी रूस ने भारत का साथ दिया था। इसके बाद 2000 में दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की, जिसे 2010 में “विशेष” दर्जा दिया गया। हालांकि हालिया घटनाओं जैसे रूस-यूक्रेन युद्ध और भारत-अमेरिका संबंधों में मजबूती ने इन गहरे संबंधों को चुनौती दी है।

इन चुनौतियों के बावजूद, भारत और रूस ने हाल ही में कई नए समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इनमें छह नए परमाणु ऊर्जा संयंत्र बनाने में रूस का सहयोग और रक्षा, अंतरिक्ष और व्यापार क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना शामिल है। साथ ही भारत ने रूस से सस्ता तेल खरीदना शुरू कर दिया है। दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य भी रखा है। कुल मिलाकर, यह रिश्ता मजबूत बना हुआ है और भविष्य में और मजबूत होने की उम्मीद है।

यह रिश्ता सहयोग, कूटनीति और रणनीतिक साझेदारी का एक अनूठा मिश्रण है। इस लेख में हम भारत-रूस संबंधों के इतिहास, वर्तमान चुनौतियों और हाल ही में हुए विकासों पर गहराई से नज़र डालेंगे।

सोवियत संघ से विरासत में मिला मजबूत रिश्ता (Strong Ties Inherited from the Soviet Union)

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद द्विध्रुवीय विश्व व्यवस्था में भारत और सोवियत संघ करीबी सहयोगी बनकर उभरे। शीत युद्ध के दौरान, सोवियत संघ ने भारत को आर्थिक, सैन्य और राजनीतिक समर्थन दिया। इस समर्थन में खाद्य आपूर्ति, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों की स्थापना, और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान सैन्य सहायता शामिल थी। भारत सोवियत संघ का एक प्रमुख रक्षा साझेदार भी बन गया, जिससे उसने लड़ाकू विमान, टैंक और अन्य सैन्य उपकरण प्राप्त किए।

रणनीतिक साझेदारी का नया दौर (A New Era of Strategic Partnership)

सोवियत संघ के विघटन के बाद, भारत और रूस के संबंधों में निरंतरता बनी रही। 2000 में, दोनों देशों ने एक “रणनीतिक साझेदारी” की घोषणा की, जिसने उनके सहयोग के दायरे को और व्यापक बना दिया। 2010 में, इस साझेदारी को “विशेष” दर्जा दिया गया, जो दोनों देशों के बीच उच्चतम स्तर का सहयोग दर्शाता है।

सहयोग के प्रमुख क्षेत्र (Key Areas of Cooperation)

भारत और रूस के बीच सहयोग कई क्षेत्रों में फैला हुआ है, जिनमें शामिल हैं:

  • रक्षा: रूस भारत का सबसे बड़ा रक्षा आपूर्तिकर्ता है. भारत रूसी लड़ाकू विमान, मिसाइल प्रणालियों, युद्धपोतों और अन्य सैन्य उपकरणों पर बहुत अधिक निर्भर करता है.
  • परमाणु ऊर्जा: रूस भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण साझेदार है. कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र सहित कई परियोजनाओं में दोनों देशों ने साथ मिलकर काम किया है. हाल ही में, छह नए परमाणु ऊर्जा संयंत्र बनाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं.
  • अंतरिक्ष: भारत और रूस अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में भी सहयोग करते हैं. दोनों देशों ने संयुक्त रूप से मंगलयान मिशन पर काम किया है और भविष्य में भी अंतरिक्ष कार्यक्रमों में सहयोग की उम्मीद है.
  • अर्थव्यवस्था और व्यापार: भारत और रूस द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं. हाल ही में उन्होंने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है. इसके अलावा, रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदने का भारत का फैसला दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूत करेगा.

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चुनौतियों का सामना (Facing Challenges)

हालांकि भारत और रूस के बीच संबंध मजबूत बने हुए हैं, लेकिन उन्हें कुछ चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है. इनमें शामिल हैं:

  • रूस-यूक्रेन युद्ध: रूस-यूक्रेन युद्ध ने वैश्विक परिदृश्य को बदल दिया है और भारत को एक कठिन स्थिति में डाल दिया है. भारत ने इस युद्ध में तटस्थ रुख अपनाया है, जिससे अमेरिका और अन्य पश्चिमी देश नाखुश हैं. यह तटस्थ रुख भारत-रूस संबंधों को प्रभावित कर सकता है.
  • भारत-अमेरिका संबंध मजबूत होना (Growing India-US Relations): शीत युद्ध के बाद से, भारत और अमेरिका के बीच संबंधों में काफी सुधार हुआ है. दोनों देश अब करीबी रणनीतिक साझेदार हैं और रक्षा, आतंकवाद विरोधी सहयोग और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग जैसे क्षेत्रों में साथ मिलकर काम कर रहे हैं. भारत के अमेरिका के साथ मजबूत होते संबंधों को लेकर रूस में कुछ आशंकाएं हैं.
  • प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Technology Transfer): रक्षा क्षेत्र में सहयोग के बावजूद, भारत रूस से नवीनतम सैन्य प्रौद्योगिकी हासिल करने में कठिनाइयों का सामना कर रहा है. रूस कई मामलों में प्रमुख तकनीकों को साझा करने के लिए अनिच्छुक रहा है.
  • व्यापार असंतुलन (Trade Imbalance): भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार में असंतुलन है. भारत मुख्य रूप से रूस से रक्षा उपकरण और कच्चा तेल आयात करता है, जबकि रूस भारत से अपेक्षाकृत कम आयात करता है. भारत रूस को अधिक निर्यात करने के लिए नए रास्ते तलाश रहा है.

नई गति पकड़ता सहयोग (Gaining Momentum Cooperation)

चुनौतियों के बावजूद, भारत और रूस के बीच सहयोग हाल ही में कई क्षेत्रों में गति पकड़ रहा है. कुछ महत्वपूर्ण उदाहरणों में शामिल हैं:

  • नए समझौते और ज्ञापन (New Agreements and MoUs): जून 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस यात्रा के दौरान, दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए. इनमें छह नए परमाणु ऊर्जा संयंत्र बनाने में रूस का सहयोग, रक्षा, अंतरिक्ष और व्यापार सहयोग बढ़ाने के लिए समझौते शामिल हैं.
  • रक्षा सहयोग कायम रहना (Continuing Defense Cooperation): रूस भारत का सबसे बड़ा रक्षा आपूर्तिकर्ता बना हुआ है और दोनों देश नियमित रूप से सैन्य अभ्यास करते हैं.
  • सस्ते तेल का आयात (Import of Cheap Oil): रूस-यूक्रेन युद्ध के मद्देनजर, भारत ने रियायती दरों पर रूस से कच्चा तेल खरीदना शुरू कर दिया है. यह कदम दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देगा.

भविष्य की दिशा (Direction of the Future)

भारत और रूस के बीच संबंधों का भविष्य कई कारकों पर निर्भर करेगा, जिनमें वैश्विक परिस्थिति, भारत-अमेरिका संबंधों की प्रकृति और दोनों देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने के लिए किए गए प्रयास शामिल हैं. हालांकि चुनौतियां हैं, हालिया घटनाओं से पता चलता है कि भारत और रूस अपने मजबूत ऐतिहासिक संबंधों और साझा हितों के आधार पर सहयोग को और मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह रिश्ता आने वाले दशकों में वैश्विक परिदृश्य को कैसे प्रभावित करेगा, यह देखना बाकी है।

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