Unemployment Rate भारत में कितनी है?

नया डेटा क्या कहता है, जानिए पूरी रिपोर्ट

Unemployment Rate भारत में कितनी है?

Unemployment Rate भारत में कितनी है? नया डेटा क्या कहता है, जानिए पूरी रिपोर्ट

नई दिल्ली: भारत में लाखों युवा हर साल डिग्री हासिल कर रहे हैं, लेकिन उनमें से बड़ी संख्या को नौकरी नहीं मिल पा रही है। हाल ही में जारी नए आंकड़ों ने देश में रोजगार की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। बेरोजगारी दर 7% से ऊपर बनी हुई है, जबकि शहरी युवाओं के लिए नौकरी पाना और भी कठिन होता जा रहा है। सवाल यह है कि आखिर भारत में बेरोजगारी की असली स्थिति क्या है, किन राज्यों में समस्या सबसे ज्यादा है और आने वाले समय में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे या नहीं।

वर्तमान बेरोजगारी दर (Unemployment Rate) क्या है?

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी (CMIE) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत में बेरोजगारी दर (Unemployment Rate) हाल के महीनों में लगभग 7% से 8% के बीच बनी हुई है। हालांकि यह दर महीने दर महीने बदलती रहती है।

शहरी और ग्रामीण अंतर

शहरी बेरोजगारी दर: लगभग 8%–9%
ग्रामीण बेरोजगारी दर: लगभग 6%–7%

शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी अधिक होने का कारण है — ज्यादा प्रतिस्पर्धा, सीमित नौकरियां और उच्च शिक्षित युवाओं की बड़ी संख्या।

युवाओं में बेरोजगारी सबसे बड़ी चुनौती

भारत में 18 से 30 वर्ष के बीच के युवाओं में बेरोजगारी दर(Unemployment Rate) अपेक्षाकृत अधिक है। कई रिपोर्टों के अनुसार, शिक्षित युवाओं में बेरोजगारी दर सामान्य औसत से काफी ऊपर है।

हर साल लाखों छात्र स्नातक और स्नातकोत्तर डिग्री हासिल करते हैं, लेकिन उसी अनुपात में रोजगार के अवसर नहीं बन पा रहे हैं। विशेषकर इंजीनियरिंग, सामान्य स्नातक और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं में नौकरी को लेकर अस्थिरता अधिक है।

पिछले 10 वर्षों में बेरोजगारी का रुझान

यदि पिछले एक दशक का रुझान देखें तो:

2016 के बाद बेरोजगारी दर (Unemployment Rate) में वृद्धि दर्ज की गई।
कोविड-19 महामारी के दौरान 2020 में बेरोजगारी दर(Unemployment Rate) में भारी उछाल आया।
लॉकडाउन के दौरान यह दर दो अंकों तक पहुंच गई थी।
2021–2023 के बीच धीरे-धीरे सुधार हुआ, लेकिन पूरी तरह स्थिरता नहीं आई।

महामारी के बाद अर्थव्यवस्था में सुधार जरूर हुआ है, लेकिन रोजगार सृजन की गति अभी भी चुनौती बनी हुई है।

राज्यवार स्थिति

भारत में बेरोजगारी दर(Unemployment Rate) सभी राज्यों में समान नहीं है। कुछ राज्यों में यह राष्ट्रीय औसत से अधिक है, जबकि कुछ राज्यों में अपेक्षाकृत कम है।

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आम तौर पर:

हरियाणा, राजस्थान और कुछ उत्तरी राज्यों में बेरोजगारी दर अधिक दर्ज की जाती है।
गुजरात, कर्नाटक और कुछ पूर्वोत्तर राज्यों में दर अपेक्षाकृत कम देखी गई है।

हालांकि यह आंकड़े समय के साथ बदलते रहते हैं।

बेरोजगारी बढ़ने के प्रमुख कारण

विशेषज्ञों के अनुसार, बेरोजगारी के पीछे कई कारण हैं:

1. जनसंख्या में तेजी से वृद्धि
2. सरकारी नौकरियों की सीमित संख्या
3. निजी क्षेत्र में धीमी भर्ती
4. ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बढ़ता उपयोग
5. स्किल गैप (कौशल और नौकरी की जरूरत में अंतर)

आज कई उद्योगों को प्रशिक्षित और तकनीकी कौशल वाले कर्मचारी चाहिए, जबकि बड़ी संख्या में युवा पारंपरिक शिक्षा के साथ नौकरी खोज रहे हैं।

सरकारी योजनाएं और प्रयास

सरकार ने रोजगार सृजन के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं:

  • स्किल इंडिया मिशन
  • स्टार्टअप इंडिया
  • मेक इन इंडिया
  • प्रधानमंत्री मुद्रा योजना
  • प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP)

इन योजनाओं का उद्देश्य युवाओं को कौशल प्रशिक्षण, स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित करना है।

निजी क्षेत्र और नए अवसर

भारत में टेक्नोलॉजी, ई-कॉमर्स, फिनटेक, मैन्युफैक्चरिंग और ग्रीन एनर्जी सेक्टर में रोजगार के नए अवसर बन रहे हैं।

डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार से फ्रीलांसिंग, रिमोट जॉब और गिग इकॉनमी में भी वृद्धि हुई है। हालांकि इन नौकरियों में स्थिरता और सामाजिक सुरक्षा का अभाव एक चिंता का विषय है।

क्या आने वाले समय में स्थिति सुधरेगी?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत 7% से अधिक की आर्थिक वृद्धि दर बनाए रखता है और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश बढ़ता है, तो रोजगार सृजन में तेजी आ सकती है।

इसके लिए जरूरी है:

  • कौशल विकास में सुधार
  • छोटे और मध्यम उद्योगों को प्रोत्साहन
  • श्रम कानूनों में संतुलित सुधार
  • शिक्षा प्रणाली को रोजगार उन्मुख बनाना

भारत में बेरोजगारी दर फिलहाल 7–8% के आसपास बनी हुई है, जो एक बड़ी आर्थिक और सामाजिक चुनौती है। युवाओं में बेरोजगारी की समस्या सबसे गंभीर है।

हालांकि सरकार और निजी क्षेत्र दोनों रोजगार सृजन के प्रयास कर रहे हैं, लेकिन तेज आर्थिक वृद्धि के साथ-साथ कौशल विकास और उद्योग विस्तार पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

आने वाले वर्षों में भारत की रोजगार स्थिति देश की आर्थिक नीतियों और निवेश माहौल पर निर्भर करेगी।

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