DU में UGC Regulation 2026 पर अधिकार रैली

UGC Regulation 2026 क्या है और क्यों है विवाद में

DU में UGC Regulation 2026 पर अधिकार रैली

DU में UGC Regulation 2026 पर अधिकार रैली, मजबूत नियमों की मांग

नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के नॉर्थ कैंपस में उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव रोकने के लिए बनाए गए यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन 2026 को लेकर एक अधिकार रैली आयोजित की गई। इस रैली में क्रांतिकारी युवा संगठन (KYS) सहित कई छात्र संगठनों और छात्रों ने भाग लिया। रैली के दौरान छात्रों और संगठनों ने उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत और अन्य प्रकार के भेदभाव को रोकने के लिए मजबूत और प्रभावी नियामक तंत्र की मांग उठाई।

UGC Regulation 2026 क्या है और क्यों है विवाद में

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने हाल ही में “उच्च शिक्षा संस्थानों में समता संवर्धन हेतु रेगुलेशन 2026” जारी किए थे। इनका उद्देश्य धर्म, जाति, लिंग, जन्म स्थान, नस्ल और निशक्तता के आधार पर होने वाले भेदभाव को रोकना था।

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हालांकि, इन नियमों को लेकर कुछ समूहों ने आपत्ति जताई और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने फिलहाल इन नियमों के लागू होने पर रोक लगा दी है। कोर्ट के इस फैसले के बाद इस मुद्दे पर देशभर में बहस तेज हो गई है।

DU में UGC Regulation 2026 पर अधिकार रैली

जातिगत भेदभाव के बढ़ते मामलों पर चिंता

यूजीसी द्वारा संसद की स्थायी समिति को दिए गए आंकड़ों के अनुसार, देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव की शिकायतें बढ़ी हैं। वर्ष 2019-20 में जहां 173 शिकायतें दर्ज हुई थीं, वहीं 2023-24 में यह संख्या बढ़कर 378 हो गई।

यह डेटा देश के 2,256 उच्च शिक्षण संस्थानों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है। विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक मामलों की संख्या इससे अधिक हो सकती है, क्योंकि कई मामले दर्ज ही नहीं हो पाते।

इसके अलावा, यूजीसी के आंकड़ों के अनुसार, देश के 3,522 उच्च शिक्षण संस्थानों में से केवल 3,067 में ही समान अवसर प्रकोष्ठ (Equal Opportunity Cell) मौजूद हैं।

रैली में उठी मजबूत और स्वतंत्र शिकायत निवारण तंत्र की मांग

रैली में शामिल छात्र संगठनों ने कहा कि भेदभाव रोकने के लिए केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए स्वतंत्र और मजबूत शिकायत निवारण तंत्र होना जरूरी है।

छात्र संगठनों ने यह भी कहा कि शिकायतों की जांच पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए और यदि कोई शिकायत झूठी पाई जाती है, तो उसके लिए भी स्पष्ट प्रावधान होना चाहिए, ताकि सिस्टम का दुरुपयोग न हो।

रेगुलेशन में खामियों और क्रियान्वयन को लेकर सवाल

रैली में यह भी मुद्दा उठाया गया कि रेगुलेशन के तहत बनने वाली इक्विटी कमेटियों के सदस्य संस्थान प्रशासन द्वारा नियुक्त किए जाएंगे। इससे उनकी स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं।

छात्र संगठनों ने यह भी कहा कि कई मामलों में संस्थानों के प्रशासन पर ही आरोप लगते हैं, ऐसे में शिकायतों के निष्पक्ष समाधान के लिए स्वतंत्र तंत्र जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर छात्रों और संगठनों की प्रतिक्रिया

सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूजीसी रेगुलेशन पर रोक लगाए जाने के फैसले के बाद छात्र संगठनों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव रोकने के लिए प्रभावी नियमों और उनके सख्त क्रियान्वयन की जरूरत है।

छात्र संगठनों ने सरकार और यूजीसी से मांग की है कि भेदभाव रोकने के लिए मजबूत और स्पष्ट नियम बनाए जाएं, जिससे सभी छात्रों को समान अवसर और न्याय मिल सके।

देशभर में इस मुद्दे पर बढ़ सकती है बहस

विशेषज्ञों का मानना है कि यूजीसी रेगुलेशन 2026 और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उच्च शिक्षा में समानता और भेदभाव के मुद्दे पर देशभर में बहस और तेज हो सकती है।

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