दिल्ली के पॉश इलाके GK-1 में बड़ा Land Grabbing Racket बेनकाब, वकील समेत 3 गिरफ्तार; बुजुर्गों की कोठियां थे निशाने पर
नई दिल्ली | Hamara Times News Desk दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने राजधानी के सबसे महंगे इलाकों में से एक, ग्रेटर कैलाश (GK-1) में सक्रिय एक हाई-प्रोफाइल Land Grabbing (जमीन हड़पने वाले) गिरोह का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह फर्जी दस्तावेजों और अदालती मुकदमों का जाल बुनकर करोड़ों की संपत्तियों पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा था। पुलिस ने इस मामले में एक वकील सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।
कैसे हुआ इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा?
मामले की शुरुआत पिछले साल सितंबर में हुई, जब ग्रेटर कैलाश-1 के एक निवासी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता ने एक राष्ट्रीय दैनिक समाचार पत्र में छपा एक पब्लिक नोटिस देखा, जिसमें कुछ अज्ञात लोगों ने उनकी पुश्तैनी संपत्ति पर अपना मालिकाना हक जताया था।
जब पुलिस ने प्राथमिक जांच की, तो पता चला कि शिकायतकर्ता का परिवार दशकों से उस संपत्ति का कानूनी मालिक है और उनके पास पुख्ता रजिस्ट्री व सेल डीड मौजूद हैं। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया।
वकील और उसके साथी सलाखों के पीछे
क्राइम ब्रांच ने गहन जांच के बाद 22 जनवरी को तीन आरोपियों को दबोच लिया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान आशीष चौधरी, विनीत कुमार सहगल और दिलीप कुमार पांडे के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, इनमें से एक आरोपी पेशेवर वकील है, जो कानूनी दांव-पेंचों का इस्तेमाल कर फर्जीवाड़े को ‘वैध’ रूप देने का काम करता था।
यह भी पढ़ें: Listunite सेवा प्रदाताओं के लिए मंच
साजिश का तरीका (Modus Operandi): बुजुर्गों को बनाते थे निशाना
डीसीपी (क्राइम ब्रांच) आदित्य गौतम के अनुसार, यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से काम करता था:
-
पहचान: गिरोह पहले उन प्राइम प्रॉपर्टीज को चिह्नित करता था जिनके मालिक बुजुर्ग हैं या जो लंबे समय से विवादों से दूर हैं।
-
जालसाजी: इसके बाद संपत्ति के फर्जी मालिकाना हक के दस्तावेज, जैसे ‘रिलीज डीड’ तैयार किए जाते थे।
-
कानूनी ढाल: फर्जीवाड़े को असली दिखाने के लिए ये लोग अदालतों में दीवानी मुकदमे (Civil Suits) दायर कर देते थे, ताकि भविष्य में अवैध कब्जे को कानूनी रूप दिया जा सके।
-
फर्जी गवाह: जांच में सामने आया कि आरोपियों ने कोर्ट में ऐसे गवाहों के नाम दिए थे, जिनमें से कुछ की मौत हो चुकी थी और कुछ के पते फर्जी थे।
पुलिस की कार्रवाई और धाराएं
पुलिस ने आरोपियों के पास से वे मूल दस्तावेज भी बरामद कर लिए हैं जिनके साथ छेड़छाड़ की गई थी। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है:
-
धारा 329(4): आपराधिक अतिक्रमण (Criminal Trespassing)
-
धारा 336(3) व 338: फर्जीवाड़ा और कीमती दस्तावेजों की जालसाजी।
-
धारा 340(2): फर्जी दस्तावेजों का असली के रूप में इस्तेमाल।
-
धारा 61(2): आपराधिक साजिश।
जांच जारी: और भी कई संपत्तियां हो सकती हैं निशाने पर
क्राइम ब्रांच अब इस बात की जांच कर रही है कि इस गिरोह ने दिल्ली के किन-किन अन्य इलाकों में ऐसी वारदातों को अंजाम दिया है। पुलिस को शक है कि इस रैकेट में कुछ और लोग भी शामिल हो सकते हैं और कई अन्य संपत्तियों को भी इसी तरह हड़पने की कोशिश की गई होगी।
Follow us on Facebook, YouTube and Twitter for latest updates.











