Iran-US Conflict Impact: 23 हजार से ज्यादा फ्लाइट रद्द

एयरलाइन कंपनियों को लगभग 2.6 अरब डॉलर का सीधा राजस्व नुकसान हुआ है।

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Iran-US Conflict Impact: 23 हजार से ज्यादा फ्लाइट रद्द, क्या अब फिर शुरू होंगी उड़ानें?

मध्य-पूर्व में चल रहा ईरान-अमेरिका और इज़राइल संघर्ष सिर्फ सैन्य टकराव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था, विमानन उद्योग और पर्यटन पर भी पड़ा है। इस युद्ध और ईरान के जवाबी हमलों की वजह से खाड़ी देशों का एयरस्पेस बंद हो गया, हजारों फ्लाइट रद्द हो गईं और एयरलाइन कंपनियों को अरबों डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा।

हाल ही में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने पड़ोसी देशों पर हुए हमलों के लिए माफी मांगी और कहा कि ईरान का मकसद युद्ध को बढ़ाना नहीं है। इसके बाद सवाल उठ रहा है कि क्या अब मध्य-पूर्व में फ्लाइट सेवाएं फिर से शुरू हो सकती हैं।

ईरान-अमेरिका संघर्ष(Iran-US Conflict) से कितना आर्थिक नुकसान हुआ?

ईरान पर अमेरिकी और इज़राइली हमलों के बाद ईरान ने भी कई देशों की ओर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इससे पूरे मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ गया और कई देशों ने सुरक्षा कारणों से अपना एयरस्पेस बंद कर दिया।

इस संघर्ष का असर वैश्विक बाजार पर भी पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के बाद एयरलाइन, होटल और ट्रैवल कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई और केवल एक दिन में ट्रैवल सेक्टर की कंपनियों के बाजार मूल्य में करीब 22.6 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई।

इसके अलावा तेल की कीमतें भी तेजी से बढ़ीं, जिससे एयरलाइन कंपनियों की लागत और बढ़ गई। विमानन उद्योग के विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह संघर्ष लंबे समय तक चला तो इसका असर वैश्विक व्यापार और पर्यटन उद्योग पर भी पड़ेगा।

फ्लाइट कैंसिल होने से कितना नुकसान हुआ?

ईरान-अमेरिका संघर्ष(Iran-US Conflict) के कारण मध्य-पूर्व के कई देशों जैसे कतर, यूएई, कुवैत, बहरीन और इराक ने अस्थायी रूप से अपना एयरस्पेस बंद कर दिया। इसके चलते दुनिया भर की एयरलाइनों को अपने विमान रद्द या दूसरे रास्तों से उड़ाने पड़े।

रिपोर्ट के मुताबिक इस संकट के दौरान 23,000 से अधिक फ्लाइट रद्द हो चुकी हैं।

इन फ्लाइट रद्द होने से एयरलाइन उद्योग को भारी नुकसान हुआ। एक अनुमान के अनुसार एयरलाइन कंपनियों को लगभग 2.6 अरब डॉलर का सीधा राजस्व नुकसान हुआ है।

कुछ विश्लेषणों के अनुसार यदि एयरस्पेस लंबे समय तक बंद रहता है तो एयर ट्रैवल मार्केट को कुल मिलाकर 20 अरब डॉलर तक का नुकसान हो सकता है।

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इसके अलावा हर दिन सैकड़ों उड़ानें रद्द होने से लाखों यात्री प्रभावित हुए हैं और कई एयरपोर्ट पर यात्रियों की भीड़ लग गई।

भारत और दुनिया पर भी पड़ा असर

इस संघर्ष का असर भारत पर भी देखा गया। रिपोर्ट के अनुसार भारत के कई बड़े एयरपोर्ट जैसे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता से उड़ने वाली 140 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय फ्लाइटें रद्द करनी पड़ीं।

इतना ही नहीं, एयरस्पेस बंद होने के कारण कई उड़ानों को लंबा रास्ता लेना पड़ा, जिससे ईंधन की लागत बढ़ गई और टिकट की कीमतें भी बढ़ गईं। कुछ अंतरराष्ट्रीय रूट पर टिकट की कीमतें कई गुना तक बढ़ गईं।

पर्यटन और व्यापार पर असर

इस संघर्ष का असर सिर्फ विमानन उद्योग तक सीमित नहीं रहा। पर्यटन क्षेत्र भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि मध्य-पूर्व में आने वाले पर्यटकों की संख्या 11% से 27% तक घट सकती है।

इसके अलावा कार्गो फ्लाइट बंद होने से कई देशों में मेडिकल सप्लाई, खाद्य पदार्थ और व्यापारिक सामान की सप्लाई भी प्रभावित हुई।

क्या अब फिर शुरू होंगी फ्लाइटें?

ईरान के राष्ट्रपति द्वारा पड़ोसी देशों से माफी मांगने और तनाव कम करने की अपील के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो सकती है। कुछ एयरलाइनों ने सीमित स्तर पर उड़ानें शुरू करने की तैयारी भी शुरू कर दी है।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि एयरस्पेस खुलने के बाद भी फ्लाइट सेवाएं पूरी तरह सामान्य होने में समय लग सकता है। विमानन विशेषज्ञों के अनुसार इतने बड़े स्तर पर उड़ानें रद्द होने के बाद एयरलाइन शेड्यूल को सामान्य करने में कई हफ्ते या महीनों तक का समय लग सकता है।

इसके अलावा सुरक्षा स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होने के बाद ही एयरलाइन कंपनियां नियमित उड़ानें शुरू करेंगी।

आगे क्या हो सकता है?

मध्य-पूर्व में हालात अभी पूरी तरह शांत नहीं हुए हैं। अगर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम होता है तो एयरस्पेस धीरे-धीरे खुल सकता है और उड़ान सेवाएं बहाल हो सकती हैं।

लेकिन यदि संघर्ष दोबारा बढ़ता है तो विमानन उद्योग, पर्यटन और वैश्विक व्यापार को और भी बड़ा नुकसान हो सकता है।

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