Congress vs BJP, किसके शासन में ज्यादा चली संसद?
Congress vs BJP के शासन में किसके समय ज्यादा चली संसद?
नई दिल्ली: संसद देश की सबसे महत्वपूर्ण संस्था है, जहां कानून बनाए जाते हैं और जनता के मुद्दों पर चर्चा होती है। लेकिन हाल के वर्षों में संसद का बार-बार स्थगित होना एक बड़ा मुद्दा बन गया है। हंगामे और विरोध के कारण कई बार पूरा दिन बिना काम के खत्म हो जाता है। ऐसे में यह सवाल भी उठता है कि कांग्रेस (2004–2014) और BJP (2014–अब तक) के शासन में संसद कितने दिन चली और किसके समय ज्यादा काम हुआ।
संसद स्थगित होने का मतलब क्या है?
जब सदन की कार्यवाही तय समय से पहले रोक दी जाती है, तो उसे स्थगन (Adjournment) कहा जाता है। यह फैसला लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति लेते हैं। आमतौर पर हंगामा, विरोध या अनुशासनहीनता के कारण ऐसा होता है।
2004 से 2014: कांग्रेस शासन में संसद कितने दिन चली?
2004 से 2014 तक केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार रही। इस दौरान संसद की कार्यवाही अपेक्षाकृत अधिक चली।
मुख्य आंकड़े (UPA सरकार 2004–2014):
- कुल बैठक दिवस (Lok Sabha): लगभग 1,357 दिन
- औसत प्रति वर्ष: 135 दिन
- कार्यवाही का औसत समय: 70%–80%
- कई महत्वपूर्ण कानून पास हुए, जैसे RTI Act, Food Security Act आदि
हालांकि इस दौरान भी कुछ सत्रों में हंगामा हुआ, लेकिन कुल मिलाकर संसद अधिक समय तक चली।
2014 से अब तक: BJP शासन में संसद कितने दिन चली?
2014 से केंद्र में BJP के नेतृत्व वाली NDA सरकार है। इस दौरान भी संसद के कई सत्र हुए, लेकिन हाल के वर्षों में स्थगन की घटनाएं बढ़ी हैं।
मुख्य आंकड़े (NDA सरकार 2014–2024):
Congress vs BJP: किसके समय ज्यादा चली संसद?
| अवधि | सरकार | कुल बैठक दिवस | औसत प्रति वर्ष |
| 2004–2014 | कांग्रेस (UPA) | 1,357 दिन | 135 दिन |
| 2014–2024 | BJP (NDA) | 1,020 दिन | 100–110 दिन |
आंकड़ों के अनुसार, कांग्रेस शासन (2004–2014) में संसद अधिक दिन चली और औसत बैठक दिवस भी ज्यादा थे। BJP शासन (2014–अब तक) में भी कई महत्वपूर्ण कानून पास हुए, लेकिन बैठक दिवस का औसत थोड़ा कम रहा है।
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बार-बार स्थगन की मुख्य वजह
1. सरकार और विपक्ष के बीच टकराव
विपक्ष कई मुद्दों पर चर्चा की मांग करता है, जबकि सरकार अपने एजेंडे के अनुसार काम करना चाहती है।
2. विरोध और नारेबाजी
सांसद वेल में आकर विरोध करते हैं, जिससे कार्यवाही रोकनी पड़ती है।
3. राजनीतिक ध्रुवीकरण
हाल के वर्षों में राजनीतिक टकराव बढ़ा है, जिससे संसद की कार्यवाही अधिक प्रभावित हुई है।
संसद स्थगित होने से क्या नुकसान होता है?
लोकतंत्र के लिए संसद का चलना क्यों जरूरी है?
संसद लोकतंत्र की नींव है। अगर संसद ठीक से नहीं चलेगी, तो जनता की आवाज कमजोर हो जाएगी। इसलिए सरकार और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी है कि वे संसद को सुचारू रूप से चलाएं।
2004 से 2014 तक कांग्रेस शासन में संसद अधिक दिन चली, जबकि 2014 के बाद BJP शासन में औसत बैठक दिवस थोड़ा कम रहा है। हालांकि दोनों ही अवधियों में हंगामे और स्थगन हुए हैं। लोकतंत्र को मजबूत रखने के लिए जरूरी है कि संसद नियमित रूप से चले और जनता के मुद्दों पर गंभीर चर्चा हो।
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