तीन महीने में ही केस की सुनवाई पूरी,कोर्ट ने पेश की मिसाल

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तीन महीने में ही केस की सुनवाई पूरी,कोर्ट ने पेश की मिसाल

courtन्यूज़ डेस्क-कोर्ट का नाम सुनते ही दिमाग में ये ख्याल आता है की वहां का काम बहुत लेटलतीफी होगा। वहां एक केस के खत्म होने में कई साल गुज़र जाता है जिसके बाद ही फैसला आता है लेकिन इसके विपरीत दिल्ली सेशन कोर्ट तिस हज़ारी ने एक मिसाल पेश की है। यहाँ एक केस की सुनवाई लगभग तीन महीनो में पूरी हो गई। बीते साल 30 नवम्बर को जिला सेंट्रल दिल्ली, पुलिस थाना चांदनी महल में एफआईआर नंबर-235 /35 धारा 376 ,377 के तहत रेप का मामला दर्ज हुआ था। ये शिकायत लाल कुआँ दिल्ली छः की निवासी रुकसाना(बदला हुआ नाम) ने मंगोलपुरी निवासी सूरज (बदला हुआ नाम) के खिलाफ दर्ज करवाई थी। मामला दर्ज होने के अगले दिन ही कोर्ट में धारा 164 के तहत महिला मजिस्ट्रेट के सामने बयान लिया गया। बयान के बाद 21 दिसम्बर को पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी पर सेशन कोर्ट में केस चलता रहा। पुलिस ने चार्ज शीट भी दाखिल की।

कोर्ट ने लगातार 11 जनवरी,20 जनवरी,23 जनवरी,30 जनवरी,2 फरवरी और 4 फरवरी को सुनवाई की। 4 फरवरी को कोर्ट ने आरोपी को सबूत के आधार पर  बरी कर दिया।

advआरोपी की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता आशकार हुसैन पाशा ने कहा की सुनवाई के दौरान ये बाते सामने आई की पीड़िता ने इस केस से पहले भी कई लोगों पर ऐसे आरोप लगा चुकी है। इस केस के इन्वेस्टीगेशन की पूरी रिपोर्ट जज साहब के सामने आते ही उन्होंने आरोपी को सबूतों के आधार पर बरी कर दिया।

आगे उन्होंने कहा की किसी पर आरोप सिद्ध होना या बरी होना ये तो आम बात है लेकिन कोर्ट ने इस केस की सुनवाई जिस तरह से की वो काबिले तारीफ है। तीन महीने में पुरे केस का फैसला आ गया। जबकि कई केस के फैसले सालों बीत जाने के बाद भी आज तक नहीं आये।ऐसे ही केस की सुनवाई अगर सभी कोर्ट में हो तो कोर्ट में कामों का ज्यादा दबाब नहीं होगा। खास अगर रेप से जुड़े अपराध की सुनवाई तो जल्दी से जल्दी हनी ही चाहिए ताकि इन्साफ मिल सके।

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