समस्तीपुर विधानसभा सीट पर होगी कांटे की टक्कर

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समस्तीपुर विधानसभा सीट पर होगी कांटे की टक्कर

न्यूज़ डेस्क-बिहार में जल्दी ही चुनाव के तारीख का एलान हो जायेगा। चुनाव को देखते सभी पार्टी अपने-अपने स्तर पर तैयारियां शुरू करदी है। समस्तीपुर लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाले समस्तीपुर विधानसभा सीट जदयू की मानी जाती है। पिछले दो बार के विधानसभा चुनाव में ये सीट जदयू की पकड़ से दूर ही रही है। साल 2010 में हुए विधानसभा चुनाव में राजद प्रत्याशी अख्तारुल इस्लाम शाहिन ने जदयू प्रत्याशी रामनाथ ठाकुर को 1827 मतों से हराया था। वहीँ 2015 में राजद जदयू मिल कर चुनाव लड़ी और एक बार फिर ये सीट राजद के खाते में गयी। इस सीट से अख्तारुल इस्लाम शाहिन ने एक बार फिर बीजेपी के उम्मीदवार रेनू कुमारी को 31080 मतों से हराया।

कौन-कौन सा क्षेत्र आता है समस्तीपुर विधानसभा में

समस्तीपुर विधानसभा के अंतर्गत समस्तीपुर नगर पालिका के क्षेत्र,समस्तीपुर के ब्लाक समेत शाहपुर बघुनी,भरोख्रा,ताजपुर,अधारपुर और बगही ग्राम पंचायत आता है।

क्या है मौजूदा समीकरण

इस विधानसभ पर अभी राजद का कब्ज़ा है। राजद की अभी भी पकड़ मजबूत है लेकिन 2015 में राजद और जदयू दोनों गठबंधन में चुनाव लड़ी थी। इस बार राजद अलग और बीजेपी-जदयू एक साथ चुनाव लड़ेगी। अगर पिछला समीकरण देखे तो 2010 में राजद ये सीट केवल 1827 मतों से जीती थी उस समय भी राजद की टक्कर जदयू बीजेपी के गठबंधन से था। इस बार का समीकरण थोडा अलग है। हाल ही में हुए लोकसभा उप-चुनाव पर गौर करे तो एनडीए की तरफ से चुनाव लड़े प्रिंस राज को समस्तीपुर विधानसभा से 55494 मत मिले थे तो वही राजद कांग्रेस गठबंधन की तरफ से चुनाव लड़ने वाले डॉ अशोक कुमार को 52349 मत मिले थे।इस विधानसभा से एनडीए गठबंधन को केवल 3145 मतों का बढ़त था।

कौन-कौन हो सकता है उम्मीदवार

राजद की तरफ से मौजूदा विधायक अख्तारुल इस्लाम शाहिन का लड़ना तय है वहीँ जदयू से कई बार यहाँ से विधायक रहे रामनाथ ठाकुर अब राज्यसभा चले गए है तो ये सीट अभी खाली है। अगर सूत्रों की माने तो इस सीट से जदयू जिला अध्यक्ष व उजियारपुर लोकसभा की सांसद रही अश्वमेध देवी का चुनाव लड़ना तय माना जा रहा है।

क्या है जाती समीकरण

इस विधानसभा सीट पर मुस्लिम व यादव का बोलवाला है लेकिन यहाँ एससी-एसटी की संख्या भी निर्णायक है।

क्या कहते है इस विधानसभा के निवासी

राज कुमार ने बताया की मौजूदा विधायक घरेलु है और वो हमसे मिलते रहते है लेकिन रामनाथ ठाकुर भी कई बार विधायक रहे है लेकिन उनकी पहुंच आम जनता तक नहीं थी।

इस्माईल बताते है की यहाँ से राजद का जीतना तय है लेकिन जदयू के उम्मीदवार को भी देखना होगा की कौन आता है।जीत जिसकी भी हो बहुत कम मार्जिन से होगा।

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