दिल्ली में आयोजित कला पर्दर्शनी में कई कलाकारों ने की शिरकत

दिल्ली में आयोजित कला पर्दर्शनी में कई कलाकारों ने की शिरकत

leader art न्यूज़ डेस्क- दिल्ली वैसे तो दिल वालों का शहर है। यहाँ पर्दर्शनी, कव्वाली जैसे कार्यक्रम तो आम है। फिर भी इन सब के बिच अगर कला पर्दर्शनी का आयोजन हो जाए तो सोने पर सोहागा है। दिल वालों की दिल्ली में चार चाँद लगाने के लिए बहादुर शाह ज़फर मार्ग पर स्थित आरटीजन आर्ट गैलरी में बीते दिनों  कला पर्दर्शनी का आयोजन किया गया। जिसमें कई कलाकारों ने अपने कला को पेंटिंग की शकल में लोगों के सामने पेश किया। इस कला पर्दर्शनी की शोभा बढ़ाने के लिए मशहूर कवी, लेखक और युवाओं के चहेते इमरान प्रतापगढ़ी ने शिरकत की। इमरान प्रतापगढ़ी समेत प्राइम न्यूज़ के एडिटर इन चीफ मोहसिन खान, निजामुद्दीन दरगाह शरीफ से ताल्लुक रखने वाले सय्यद अफसर अली निजामी, आर्टिस्ट इन इंडिया के फाउंडर अली जैदी समेत कई गणमान्य लोगों ने शिरकत की।

इस कला पर्दर्शनी में नए कलाकारों समेत कई पुराने कलाकारों ने भी शिरकत की। इन्होने अपने द्वारा लगाई हुई पेंटिंग के द्वारा लोगों का मन मोहा। इस कला पर्दर्शनी की आयोजनकर्ता इरम खान थी। जिन्होंने इससे पहले भी कई कला पर्दर्शनी जैसे कार्यक्रम का आयोजन कर चुकी है।

आयोजनकर्ता इरम खान ने कहा की कला पर्दर्शनी आयोजन करने का मेरामकसद नए और पुराने कलाकारों को एक मंच देना है क्योंकि एक साथ रहकर पुराने कलाकारों को सिखने का मौके मिलेगा। आज कल लोग डिजिटल के दौर में जा रहे है लेकिन जो सुकून हाथ से बनाई पेंटिंग में है वो डिजिटल में कहा है।

प्राइम न्यूज़ के एडिटर इन चीफ मोहसिन खान ने कहा पेंटिंग की विरासत बचाने के लिए प्राइम न्यूज़ हमेशा इरम खान के साथ खड़ा है। आजकल न्यूज़ चैनल को राजनीती करने से फुर्सत नहीं है लेकिन प्राइम न्यूज़ राजनीती से हट भी कार्य करता है।

वहीँ मशहूर कवी और लेखक इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा की यहाँ आकर मुझे अपना बचपन याद आ गया। मैं बचपन में पेंसिल से पेंटिंग बनाता था और फिर उसे मिटा देता था आज वहीँ दिन मुझे याद आ गया। आगे उन्होंने कहा की जिस तरह एक पेंटिंग करने वाला कलाकार एक चित्र में अपनी कला को ब्रश से उतरता है ठीक उसी तरह एक कवी भी अपने लफ़्ज़ों के द्वारा अपनी सोच लोगों तक पहुचता है।

उन्होंने कहा

मैं मर के जीना,मै जी के मरना सीखा रहा हूँ,
मै तेज़ तूफान में ज़िन्दगी को तलाश करना सीखा रहा हूँ !
समंदरों से कोई कह दे, गुरूर रख दे वो साहिलों पर,
मैं इन थपेड़ो मे अपनी कश्ती को पार करना सीखा रहा हूँ  !

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