लोहार और लोहारा के चक्कर में पिस रहे इस समाज के लोग

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लोहार और लोहारा के चक्कर में पिस रहे इस समाज के लोग

न्यूज़ डेस्क-

कई बार एक ही शब्द को इंग्लिश और हिंदी में दो तरीके से लिखा जाता है। उदाहरण स्वरुप केरल को इंग्लिश में केरला लिखा जाता है लेकिन उसे पढ़ा केरल ही जाता है। यही समस्या लोहार जाति से ताल्लुक रखने वाले लगभग 25 लाख लोगों को हो रही है। *लोहार (LOHARA) जाति से ताल्लुक रखने वाले लोगों को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है वहीँ युवाओं को नौकरी मिलने में भी परेशानी हो रही है।*

गौरतलब हो की 1976 में पारित एक्ट 108-1976 के आधार पर जो अनुसूचित जनजाति का दर्ज़ा प्राप्त करते रहे लेकिन UPA 1 के समय में पारित एक्ट 48-2006 के कारण *लोहार को हिंदी में लोहारा कर दिया* जबकि मालूम हो की इस नाम की कोई जाती है ही नहीं। लोहार को लोहारा करने की वजह से इस समुदाय को मिलने वाले सारे लाभ से ये वंचित हो रहे हैं । इस गलती की वजह से केंद्र में नौकरी मिलने में परेशानी हो रही है क्योंकि जाति प्रमाण पत्र राज्य सरकार बनती है। ये जाति राज्य सरकार के हिसाब से एसटी में है लेकिन केंद्र के हिसाब से नहीं है, जिसकी वजह से छात्रों की केन्द्र सरकार की विभिन्न विभागों में नियुक्ति नहीं हो पा रही है।

केंद्रीय विधि मंत्रालय ने जारी गजट अधिसूचना में 292 पुराने कानूनों, संशोधन विधेयकों में से 290 को निरस्त कर दिया। इसी में 2006 का वह संशोधन विधेयक भी था जिसमें बिहार की ‘लोहार’ जाति को एसटी का दर्जा अमान्य व ‘लोहारा’ व ’लोहरा’ जाति को ही एसटी माना गया था। यह संशोधन, एसटी आदेश (संशोधन) अधिनियम-1976 में किया गया था, जिसमें अंग्रेजी के Lohara का हिंदी तर्जुमा ‘लोहार’ दर्ज है। 2006 के संशोधन विधेयक को निरस्त करने को, राज्य ने 1976 के अधिनियम को पुन: प्रभावी होना माना।

गौरतलब हो की बिहार राज्य सरकार इनको एसटी की सूचि में जगह दे चुकी है। इनकी मांग है की केंद्र सरकार एक सूची जारी करे और उसमें साफ़ करे की लोहारा नाम कि कोई भी जाति है ही नहीं। *जैसे केरल को इंग्लिश में KERLA लिखा जाता है उसी तरह लोहार का का अंग्रेजी (LOHARA) है लेकिन इस शब्दों के चक्कर में इस जाति के लगभग 25 लाख लोग पिस रहे हैं। इनकी दूसरी मांग है की केंद्र सरकार साफ़ कर दे कि लोहार जाति से ताल्लुक रखने वाले लोग एसटी सूचि में आते हैं और इस हिसाब से उन्हें लाभ मिलना चाहिए। तीसरी इनकी मांग है की जो भी छात्र भारत सरकार के विभिन्न नियुक्तियों में मेरिट लिस्ट में आ गए है और सिर्फ इस लोहार और लोहारा के चक्कर में वो रिजेक्ट कर दिए गए जबकि इनका अनुसूचित जनजाति का जाति प्रमाण पत्र बिल्कुल सही है तो उनको तत्काल नौकरी में ज्वाइनिंग कराया जाए। इनकी चौथी मांग यह है कि भारत सरकार के बिहार राज्य के केंद्रीय ओबीसी के सूची से “लोहार” को डिलीट किया जाए क्योंकि यह जाति 1950 से ही अनुसूचित जनजाति के सूची में है ।

इस समाज से ताल्लुक रखने वाले अवध बिहारी ने कहा की माननीय सांसद महोदय के द्वारा संसद भवन(लोक सभा) में इस मुद्दे को चार बार उठाया जा चूका है और सरकार को सांसद द्वारा बताया दिया गया है कि इस समाज से ताल्लुक रखने वाले लोगों को उनको मिलने वाली सुविधाओं से उन्हें वंचित किया जा रहा है फिर सरकार अधिसूचना नहीं ला रही है। मैं केंद्र सरकार से पूछना चाहता हूँ की सरकार ही बताये की इस इंग्लिश और हिंदी के चक्कर में हमारे समाज की क्या गलती है ?

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