पत्राचार के तहत फॉर्म भरने वाले 10वीं में फेल बच्चों ने स्कूल के बाहर किया प्रदर्शन

पत्राचार के तहत फॉर्म भरने वाले 10वीं में फेल बच्चों ने स्कूल के बाहर किया प्रदर्शन

न्यूज़ डेस्क-सीबीएसई ने सभी क्षेत्रों के 10वीं कक्षा का परीक्षा परिणाम ऐसी महीने की तीन तारीख को घोषित कर दिए हैं। इस साल 10वीं कक्षा का पास प्रतिशत 90.95 फीसदी रहा है, जबकि साल 2016 में यह आंकड़ा 96.21 फीसदी था। पिछले साल के मुकाबले इस साल पासिंग पर्सेंटेज में लगभग छः फीसदी की गिरावट आई है। देश की राजधानी की बात करे तो दिल्ली का रिजल्ट मात्र 78.09 रहा है। जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 91.06 प्रतिशत था।

इस साल दिल्ली के सरकारी स्कूल में कुछ बच्चों के पत्राचार विद्यालय (VISHWAS) से भी फॉर्म भरवाया गया था। पत्राचार विद्यालय (VISHWAS) के तहत उन्ही बच्चों के फॉर्म भरवाए गए थे जो बच्चे या तो नवीं कक्षा में फेल हो गए थे या जो किसी कारण अपना पढ़ाई छोड़ चुके थे। पत्राचार विद्यालय (VISHWAS) शालीमार बाग़ के तहत इस बार जितने बच्चों ने फॉर्म भरा था लगभग सभी फेल हुए है। अपने परिणाम को लेकर आज नांगलोई स्टेशन रोड पर स्थित राजकीय उच्त्तर माध्यमिक बाल/बालिका विद्यालय पर सैकड़ों छात्र-छात्रों और उनके अभिवावक जमा हो कर दिल्ली सरकार और स्कूल प्रशासन के खिलाफ नारे बाजी की। बच्चों ने सरकार से मांग की के उनका दुबारा दसवीं में दाखिला होना चाहिए और वो फिर से रेगुलर बच्चों के साथ पढ़ाई करे और परीक्षा दे।
स्कूल के बाहर प्रदर्शन कर रही छात्रा नंदा ने कहा की जब हम लोग नवीं में फेल हो गए तो हम लोगों को दसवीं में क्यों दाखिला दिया गया। जिस समय स्कूल प्रशासन हम लोगों के दसवीं के फॉर्म भरवा रही थी उसी समय हम लोगों ने विरोध किया था। उस समय स्कूल प्रशासन ने विश्वास दिलाया था की वो पास करवाएंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
वहीं प्रदर्शन कर रही खुशबू ने कहा की स्कूल प्रशासन ने जितने पैसे मांगे हमने दिए लेकिन उसके बाद भी हमें फेल कर दिया गया। अब हम लोग कहीं भी दाखिला भी नहीं ले सकते है और न ही 12वीं कर सकते है और न कहीं रेगुलर पढ़ सकते है। हम लोगों की मांग है की हमें दोबारा रेगुलर से पढ़ाया जाये और परीक्षा लिए जाये।
वहीँ प्रदर्शन में मौजूद अभिवावक पूनम ने कहा की स्कूल प्रशासन ने बच्चों के साथ खिलवाड़ किया है। स्कूल प्रशासन और सरकार को बच्चे का भविष्य के बारे में सोचना चाहिए।
वहीँ दूसरे अभिवावक मनोज सैनी ने कहा की दिल्ली सरकार ने जो पत्राचार सिस्टम शुरू किया है ये बच्चों को अँधेरे में रखने जैसा है। जब बच्चे किसी क्लास में फेल हो गए तो उसे अगले क्लास में डालना ही नहीं चाहिए। अगर अगले कक्षा में डाल भी दिया तो बच्चों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए ताकि बच्चे पास हो सके। शिक्षा विभाग को बच्चों के साथ न्याय करना चाहिए और बच्चों से बात करके इस मसले का हल निकालना चाहिए।

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