आज सुन रहा हूं उस शहर को जो कभी सुना नहीं जाता था – रविश कुमार

आज सुन रहा हूं उस शहर को जो कभी सुना नहीं जाता था - रविश कुमार। बहुत दूर से मोटरसाइकिल की आवाज़ आ रही है। लिखते लिखते नज़दीक आई है। फिर से दूर जाने लगी है।

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ravish kumar

आज सुन रहा हूं उस शहर को जो कभी सुना नहीं जाता था – रविश कुमार

बहुत दूर से मोटरसाइकिल की आवाज़ आ रही है। लिखते लिखते नज़दीक आई है। फिर से दूर जाने लगी है।

बिल्डिंग के नीचे एक नौजवान इस्तमाल के बाद फेंक दिए गए पैकेट को लात से मार रहा है। लात की आवाज़ नहीं आ रही है। मार खाने से पैकेट से कुछ आवाज़ आ रही है। अभी अभी उसके पांव पत्तों के ऊपर पड़े हैं। 12 वीं मंज़िल तक पत्तों के चरमराने की आवाज़ आ रही है।

सड़क कुछ देर तक बिल्कुल ख़ाली है। कुछ कुछ सेकेंट के अंतराल के बाद एक कार गुज़रती है। जैसे रेलवे फाटक पर किसी ने दायें और बायें देखने के बाद अपनी कार तेज़ी से सिग्नल क्रास करा ली हो। कुछ इसी अंदाज़ में वो कार गुज़र गई है।

फिर ख़ामोशी छाई हुई है।

इस बार बहुत दूर से गाय के रम्हाने की आवाज़ आ रही है। कभी ये आवाज़ सुनाई नहीं दी। ऐसा लग रहा है कि बगल के फ्लैट में गाय बंधी है।

सड़क उस पार कई इमारतें हैं। काफी दूरी है। मगर फ्लैट से आवाज़ें आ रही हैं। ऐसा लग रहा है कि कोई हंस रहा है। किसी के परिवार में ससुराल को लेकर बहस चल रही है। क्या मिला और क्या नहीं मिला उसकी सूची को लेकर कोई झगड़ रहा है।

आवाज़ किस फ्लैट से आ रही है, पता नहीं चल रहा है। बालकनी में कोई आदमी नहीं दिख रहा है। ध्यान से सुनने पर लगता है कि सब सुनाई दे रहा है। हालांकि कुछ सुनाई नहीं दे रहा है।

तीस साल पहले का गांव याद आया। दोपहर के वक्त ऐसा ही होता था। तब न पंखा था न बिजली। आइसक्रीम वाले का भोंपू एक किलोमीटर दूर से ही सुनाई देता था। कुछ देर के बाद साइकिल के चेन की आवाज़ सुनाई देती थी। जब तक आप उनींदे होने लगते, किसी के घर का झगड़ा सुनाई देने लगता था। बहुत ध्यान देने से समझ आने लगता था कि किसके घारी( झोंपड़ी) में कौन कौन लोग जमा होंगे। आवाज़ पहचानी जा रही है। ऐसा ही कुछ आज लग रहा है। किसी चाचा की आवाज़ लगती थी।

फिलहाल तीन चार अपार्टमेंट की बालकनी में कपड़े कम पसारे गए हैं। उम्मीद है लोगों ने स्नान किया होगा। कामवाली नहीं आई तो लगता है कि उस अपार्टमेंट में मशीन चलाने वाले कम ही हैं जिसे मैं देख रहा हूं। ऐसा नहीं है कि किसी ने भी कपड़े नहीं धोए हैं। एक महिला बहुत देर से कपड़े पसारे जा रही है। तीन चार चादरें टांग चुकी है।

उस सुनसान सड़क पर एक बुलेट सवार अकेला आ रहा है। पीठ बिल्कुल सीधी है। बुलेट की आवाज़ के साथ चला गया। हेल्मेट नहीं पहनी थी।

उसके जाने के बाद दो नौजवान आते दिखाई दे रहे हैं। बात करने की आवाज़ ऊपर तक आ रही है।

बहुत सारी चिड़ियों की आवाज़ सुनाई दे रही है। ये आवाज़ कौआ और कोयल की नहीं है। इसका मतलब है कि चिड़ियों की और भी किस्में यहां रहती हैं।

तीन रिक्शेवाले चले आ रहे हैं। ख़ाली हैं। रिक्शे की आवाज़ आ रही है।

इस बीच एक और बाइक गुज़र गई है। अपनी आवाज़ को समेटते हुए खो गई है।

ख़ाली सड़क पर प्लास्टिक का टुकड़ा उड़ रहा है। मस्ती में है शायद। झूमता हुआ सड़क से लिपटता जा रहा है। हल्की सी आवाज़ उसके खड़ खड़ की आ रही है।

अचानक शांति पसर जाती है। मैं अपनी सांसों को सुनने लगता हूं।
घड़ी देखने का मतलब नहीं है। सुबह भी दोपहर जैसी लग रही थी। दोपहर भी सुबह जैसी लग रही है।

क्या किसी ने रेशमा पुकारा है? बिल्डिंग की दूसरी तरफ की झुग्गियों में कुछ बच्चे खेल रहे हैं। शब्द साफ सुनाई नहीं दे रहे हैं मगर बच्चों की आवाज़ें आ रही हैं। ऐसा लग रहा है कि अभी इंसान धरती पर हैं। खत्म नहीं हुए हैं।

अभी-अभी एक लाल रंग की कार चुपचाप मद्धिम गति से चली जा रही है। लगता है कार वाला कर्फ्यू देखने निकला है।

तभी बाइकर दिखते हैं। हेल्मेट में हैं। एक्सलेटर तेज़ करते हैं। शांति टूट जाती है। फिर कहीं गुम हो जाते है। साइलेंसर की आवाज़ से लग रहा है कि कोई कहीं से जा रहा है।

किसी कार ने लगता है अपना हार्न टेस्ट किया है। सड़क इतनी ख़ाली है कि हार्न की ज़रूरत नहीं। मगर एक बार वह जोड़ें में पीं-पीं बजा गया है। दूर जाने के बाद एक और बार बजाता है। पीं। फिर थोड़ी देर के बाद एक और बार पीं।

उसकी प्रतिक्रिया में किसी बाइक के हार्न की आवाज़ आ गई । उसने भी अपना हार्न टेस्ट किया।

दो नौजवान चले जा रहे हैं। बातें करते हुए। अपनी जेब में हाथ डाले। पता नहीं चल रहा है कि वे ख़ाली हाथ हैं या नहीं। आज उनकी कमाई का क्या हुआ। बिल्डिंग के लोग सुरक्षित हैं।

आम दिनों में आवाज़ें शोर बन जाया करती थीं। हर तरह की आवाज़ मिलकर एक ही ध्वनि बन जाती थी। आज हर तरह की ध्वनियों को अपना वजूद मिल गया है। चिड़िया की आवाज़ और बाइक की आवाज़ में फर्क सुना जा सकता है।

इतनी आवाज़ों में फोन के रिंग करने की आवाज़ सुनाई नहीं दी। फोन शायद साइलेंट मोड पर रखे जाने लगे हैं।

अब सब शांत है। मैं लेख ख़त्म कर रहा हूं।

मैं आवाज़ें सुन रहा हूं। सुनना ही इस वक्त देखना है।

आश्वस्ति का एक ही कारण है। अभी आवाज़ बची हुई है।

#जनताकर्फ्यू

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